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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 38
अर्थः समर्थसामर्थ्याद् व्रजेत्सामर्थ्यमात्मनि । असमर्थाश्रितस्त्वर्थो नार्थोऽनर्थो हि केवलम् ।।
समर्थ व्यक्ति के सामर्थ्य के कारण से ही धन के स्थान पर सामर्थ्य आयेगा, किन्तु असमर्थ के पास में स्थित धन लाभकारी नहीं होता है, वह केवल अनर्थकारी ही होता है।
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