सचिवा उचुः -
अर्थ समर्थ इति यद्धवानाह तदर्थवत्। तन्नोति कः प्रतिब्रूते तिष्ठन् वैतण्डिकव्रते ।।
सचिव बोलें - धन ही सब सामर्थ्य से युक्त है, ऐसा जो आप कहते हैं, उस प्रकार नहीं है।
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