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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 35
तदनन्तरमेवोच्चैस्तत्र दिल्लीन्द्रमातुले। करिष्यामि प्रतीकारमगस्त्य इव सागरे ।।
तत्पश्चात्, अगस्त्य ऋषि ने जिस प्रकार समुद्र से प्रतिशोध लिया, उसी प्रकार उधर दिल्लीपति के मामा से प्रतिशोध लूंगा।
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