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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 34
तहुग्ध्वा स्म प्रभावेण पृथुवत् पृथिवीमिमाम्। तमर्थमाहरिष्यामि यदधीनमिदं जगत् ।।
अतः पृथुराजा की तरह अपने सामर्थ्य से इस पृथ्वी से कर वसूल करके, जिस पर इस संसार का आश्रय है, ऐसे उस धन को लेकर आऊँगा।
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