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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 26
परं त्वापतितं यद्धि कार्यान्तरमनन्तरम्। प्रयतिष्यामहे तस्मै वयं सर्वेऽप्यत : परम्।।
किन्तु जो यह दूसरा काम बीच में उपस्थित हो गया हे, उसके लिए हम सब प्रयत्नपूर्वक आगे कार्य करेंगे।
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