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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 24
शिवराज उवाच - कार्यान्तरप्रसक्तत्त्वात् मयि सांतरमास्थिते। संग्रामदुर्गसहिता गता चक्रामती पुरी ।।
शिवराज बोला - अन्य कार्य में व्यस्त होने के कारण से चाक नगरी संग्राम दुर्ग सहित हाथ से निकल गई।
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