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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 20
अमानुषगतिर्देव्याः प्रसादेन सुदुर्धरः। मोहयित्वा परचमूं परिवेषपरां पराम्।। प्रयातो भूधरात्तस्माद् भूभृद् भूशबलो यदि। मन्यामहे वयं तर्हि नापराधी स जोहरः ।।
देवी की कृपा से वह अमानवीय गति एवं दुर्जेय राजा भोसले, घेरा डालकर स्थित हुई विशाल शत्रुसेना को मोहित करके यदि वह किले से निकल गया तो उसमें उस जोहर का अपराध नहीं है ऐसा हमें प्रतीत होता है।
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