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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 14
भवता प्रतिरुद्धस्य भवतोऽनुमर्ति विना। दुर्गमो निर्गमस्तस्य नृपतेरिति मे मनः ॥
यदि तुने उसको कैद किया होता तो तेरी आज्ञा के बिना उसका वहाँ से निकल पाना कठिन होता, ऐसा मुझे लगता है।
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