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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 13
ततो भूरि धनं लब्ध्या बत लुब्धात्मना त्वया। कुमते ज्ञायमानोऽपि स प्रस्थास्यन्नुपेक्षितः ।।
हे दुष्टबुद्धि! 'तुझ लोभी के पास से अत्यधिक धन लेकर वह जायेगा', यह ज्ञात होते हुए भी तूने उसकी उपेक्षा की।
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