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शिवभारतम् • अध्याय 28 • श्लोक 11
वयं भागीरथीतीरे भवतो भारतीमिमाम्। पाये पायं न तृप्यामः सुधां सुमनसो यथा ।।
जिस प्रकार देव अमृतपान करके भी तृप्ति को प्राप्त नहीं होते है, उसी प्रकार भागीरथी के तट पर आपकी वाणी को पुनः पुनः सुनकर भी हमारी तृप्ति नही होती है।
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