वहाँ स्थित बर्बर की सेना का, अपने बाहुबल से तुरन्त पराजय करके शिवाजी राजा पन्हाळ के किल्ले से अपने राजगड़ आया, तब सभी सैनिक साथ में होते हुए भी एवं अनेक प्रकार के प्रयत्नों में व्यस्त रहने पर भी दिल्लीपति के मामा शाएस्ताखान को अपना इष्ट हेतु प्राप्त होता है या नहीं, इस विषय में संदेह पैदा हुआ।
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