आगतो विजयी राजा निजं राजगिरिं यदा। प्राणदन्मूदुगम्भीरस्वनं दुंदुभयस्तदा।।
जब विजयी शिवाजी राजा अपने किल्ले में आया, तब दुंदुभि, मृदु एवं गंभीर आवाज में बजने लगे।
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