इस प्रकार से अपने सम्पूर्ण सैन्य बल को अपने हाथ से शिवाजी के क्रोधरूपी समुद्र में डुबोकर लज्जित हुआ मसूद, युद्धनिपुण शत्रुओं ने उपेक्षा कर जीवित छोड़ दिया एवं उसे अत्यधिक दुःख हुआ एवं अपनों के सामने खड़ा हुआ और वह शत्रुओं से परांगमुख हो गया।
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