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शिवभारतम् • अध्याय 27 • श्लोक 35
उरुभिर्जानुभिश्वापि तथा जंघाभिरन्ध्रिभिः। शिरोभिश्च नराश्वानां दुष्प्रेक्ष्या वसुधाभवत्।।
मनुष्यों व घोड़ों की जंघाए, घटने, पैर एवं शिर इसके कारण भूमि अदर्शनीय दिखने लगी।
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