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शिवभारतम् • अध्याय 27 • श्लोक 17
अनुतप्येति स चिरं विचिन्त्य च मुहुर्मुहुः। जगाद दुर्मदं वीरं मसूदं नाम बर्बरम् ।।
इस प्रकार बहुत देर तक पश्चाताप करके एवं बारंबार विचार करके वह नशे में चूर वीर सीद्दी मसूदास बोला।
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