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शिवभारतम् • अध्याय 27 • श्लोक 16
यवनान्तकरं होनं मम हस्ताद्धिनिः सृतम्। निशम्य कि वदिष्यन्ति शास्ताखानादयोऽपि माम् ।।
यवनों का नाश करने वाला यह मेरे हाथ से निकल गया, ऐसा सुनकर शाएस्ताखान आदि भी मुझे क्या बोलेगा।
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