अघ येदिलशाहाय दर्शयिष्ये कथं मुखम्। अतः प्रभृति मे जन्म परिहासाय केवलम् ।।
अब मैं आदिलशाह को मुंह कैसे दिखाउं, यहाँ से आगे मेरा जीना केवल उपहास के लिए ही होगा।
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