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शिवभारतम् • अध्याय 27 • श्लोक 10
अंधीकृत्येव तांस्तत्र निविष्टान् प्रतियोधिनः । शिवः स्वीयेन शौर्येण परिधिं तमलंघयत् ।।
वहाँ घेराबंदी करके बैठे हुए उस शत्रु योद्धाओं को मानों अंधा करके शिवाजी अपने पराक्रम से वह घेरांबदी तोड़कर गया हो।
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