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शिवभारतम् • अध्याय 27 • श्लोक 1
मनीषिण उचुः - प्रणालभूधरादात्मनिहितानीकदुर्ग्रहात्। समं पत्तिशत्तैः षड्भिस्तमज्ञातविनिर्गतम् ।।१ जोहरः कथमज्ञासीत् मोहितो योगमायया। प्रतीकारं च कं चक्रे स्वेन चक्रेण संवृतः ।।२ शिववीरयशः क्षीरनिधिप्लावितचेतसा । परमानन्द भवता तत्सर्वमभिधीयताम्।।
पण्डित बोलें - अपने रखे हुए सैनिकों के कारण, दूर्जयी पन्हाळ के किल्ले से शिवाजी छः सौ पदाति सैनिकों के साथ निकलकर चले गए, इसका अन्दाज योगमाया से मूढ हुए जोहर को कैसे समझ में आया एवं अपने सैन्यबल से उसने कोन-सा प्रतीकार किया, यह सब वीर शिवाजी के यशरूपी क्षीर समुद्र में तैरने वाले हे परमानन्द तुम बताओ।
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