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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 8
तत्र तं स्वामिनं हित्वा त्रपां चातिमहीयसीम्। अहो युवां परभिया परावृत्तावुभावपि।।
वहां पर स्वामी को छोड़कर व सारी लज्जा को भुलाकर तुम दोनों शत्रु के डर से लौट आये यह आश्चर्य है।
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