मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 62
अथ धरणिमणिर्विशालशैलम्, निजमधिरुह्य विलोकनीयशीलम्। वसतिमभिमतां विलंधिताध्वा, स्वकटकविश्रमहेतुकामकार्षीत्।। इत्यनुपुराणे सूर्यवंशे कवीन्द्रपरमानन्दप्रकाशितायां शतसाहस्रयां संहितायां स्वराष्ट्रावेक्षणं नामाध्यायः ।।
तदनन्तर मार्ग को पार करके आये हुए राजा शिवाजी ने दर्शनीय सभागृह एवं अपने बड़े किले पर चढ़कर वहां पर अपनी सेना को विश्राम मिले इसलिए इच्छानुसार विश्रामालय बनायें।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें