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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 57
प्रस्थानदुन्दुभिस्तस्य दध्वान मधुरं तथा। ध्वनदम्भोघरश्रान्त्या परैर्न बुबुधे यथा ।।
उनका प्रस्थान दुंदुभी के आवाज के समान मधुर ध्वनि ध्वनित हुई तो शत्रु ने उसे मेघगर्जना ही समझा।
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