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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 55
इत्युदीर्य स तं धीरं धरे तस्मिन् निधाय च। यामिन्याः प्रथमे यामे प्रस्थितः पृथिवीपतिः ।।
ऐसा बोलकर उस धैर्यशाली त्र्यम्बक भास्करदास को उस किले पर छोड़कर महाराज रात्री के पहले प्रहर में चल पड़े।
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