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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 52
अतोऽस्मि प्रस्थितस्तूर्ण ताम्राननजिघांसया। परैरधर्षणीयोऽस्तु पर्वतोऽयं त्वदाश्रयः ।।
इसलिए मैं मुगलों का संहार करने की इच्छा से जल्द ही निकल रहा हू, तब शत्रुओं द्वारा दुर्जयी यह किल्ला तेरे आश्रित रहने दें।
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