हन्ताहार्यशिरस्थ स्मिन् अहिताहार्यपौरुषैः। हतो न जोहरोऽस्माभिरहो शैलतलस्थितः ।।
अरे! जिनका पराक्रम शत्रुओं के लिए अपरिहार्य है, ऐसे हमारे हाथों से इस दुर्जय किले के तलहटी में रहते हुए जोहर को हम मार न सकें यह आश्चर्य है।
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