गतायुरेष पापात्मा न चिरायुर्भविष्यति। निमित्तान्तरमाश्रित्य मृत्युरेनं जिघृक्षति ।।
इस पापी के दिन भर गये हैं ये ज्यादा दिन जीवित नहीं रहेगा, दूसरे रूप में मृत्यु इसे ग्रस लेना चाहती है।
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