तुळजोवाच -
एत्य ताम्राननैस्तत्र पुरी चक्रावती जिता। अतस्त्वयात्र न स्थेयं प्रस्थेयं पुत्र सर्वथा।।
तुळजादेवी बोली - मुगलों ने आकर चांकण का किला जीत लिया है, इसलिए पुत्र तुम यहां मत रुको, कुछ भी करके यहां से निकलो।
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