स एकदा नृस्तत्र शयानः सुखसद्यनि। प्रयतः प्रेक्षत स्वप्ने तुलजां वरदायिनीम् ।।
एक बार सुव्यवहारी राजा के सुखागार में सोते समय, उसके स्वप्न में वर देने वाली तुकाजा भवानी ने दर्शन दिये।
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