इति विज्ञापयामास तत्र तां पृतनापतिः। प्रतस्थे च प्रतापेन प्रणालमचलं प्रति ।।
इस प्रकार सेनापति ने उस समय उन्हें निवेदन किया और धैर्यपूर्वक पन्हाळगड़ की और चल दिया।
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