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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 13
एवमुक्तवतीं तत्र तां परित्रस्तचेतनः । क्षुभितां चारूचरितां चमूपतिरवोचत ।।
माता के इस प्रकार बोलने के कारण डरा हुआ, वह सेनापति क्षुब्ध होकर जिनका आचरण पवित्र है, ऐसे उस राजमाता से बोला।
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