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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 12
युध्यध्वमिह संभूय यूयमत्र परैः सह। स्वयं योत्स्यामि तेनाहं जोहरेण विरोधिना ।।
तुम रात यहां मिलकर शत्रुओं से उलझे रहो, मैं खुद उस शत्रु जोहर से लड़ती हूं।
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