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शिवभारतम् • अध्याय 26 • श्लोक 10
वन्यामिव दिशं शून्यामिमां पश्यामि यं विना। आनयिष्यामि तं सद्यः शिशुं सिंहमिवोद्धतम्।।
जिनके बिना ये दिशाएं बड़े अरण्य के समान सुनसान दिख रही है। उस सिंह के समान पराक्रमी पुत्र को मैं जल्दी से ले आउंगी।
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