मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 6
रुस्तुमः फाजिलश्चैव भग्नपूर्वावुभावपि। येदिलस्याज्ञया भूयः संभूय निजसेनया ।। समानगुणशीलेन सादातेन समन्वितौ। द्रुताग्रगामिना तेन जोहरेण समीयतुः ।।
पहले पराजय को प्राप्त होने के कारण, रुस्तम एवं फाजल दोनों ही आदिलशाह की आज्ञा पाकर फिर से अपनी सेना के साथ, समानगुणों, समान व्यवहार व हमेशा मिलकर शीघ्रता से आगे जाने वाले उस जोहर से जा के मिले।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें