पहले पराजय को प्राप्त होने के कारण, रुस्तम एवं फाजल दोनों ही आदिलशाह की आज्ञा पाकर फिर से अपनी सेना के साथ, समानगुणों, समान व्यवहार व हमेशा मिलकर शीघ्रता से आगे जाने वाले उस जोहर से जा के मिले।
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