स ततोऽनेकसाहसैरश्चवारेस्सजातिभिः । अपारः पर्वताकारैः करिभिश्व समन्वितः ।। तथा कार्णाटकैः पत्तिबलैरतिबलैर्बली। पालितं शिवभूपेन प्रणालाचलमागतम् ।।
तब वह पराक्रमी मुखिया अपने जाती के कई हजार घुड़सवार, पर्वत के समान विशाल अनगिनत हाथी एवं शक्तिशाली कर्नाटकी पदैल सेना के साथ शिवाजी के अधिकृत पन्हाळ के किले में आया।
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