मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 4
इति ध्वस्ते जनपदे स्रस्ते सैन्येऽपि भूयसि । पराधीनत्वमाप्तेषु प्रणालाद्रिषु चाद्रिषु ।। चिरयत्सु चं ताम्नेषु द्रुतमाकारितेष्वपि। विदूयमानोऽनुदिनं पतन्नत्याहिताम्बुधौ ।। अल्ली कर्णपुराधीशं जोहरं नाम बर्बरम्। आहूय प्राहिणोत्तूर्णं निग्रहीतुं शिवं नृपम्।।
इस प्रकार से वह देश नष्ट हो गया। बहुत से सैनिक मृत्यु को प्राप्त हो गए, पन्हाळ आदि किल्ले शत्रूओं के वश में हो गये तुरन्त बुलाने पर भी मुगलों ने विलम्ब किया, इस कारण प्रतिदिन दुःखी होता हुआ एवं संकटरुपी समुद्र में डुबते हुए की अल्ली आदिलशाह ने कर्णल के राजा शिद्दी जोहर को बुलाकर शिवाजी राजा को पकड़ने के लिए तुरन्त भेद दिया।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें