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शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 3
कपित्थं बदरंग्रामं मल्लग्रामं च कुण्डलम् । गोहग्राम सतीकीरमेड च मिरजं तथा ।। गोकाकं दुग्धवाटं च पुरं मुरवटं पुनः। धारावटं महादुर्गं क्षुद्रवन्धपुरं तथा।। श्यामग्राम माविलं च पारग्रामं च संगलम्। काणदं कर्दमवटं कागलं ह्रीयलं तथा।। हनुवल्लीं हूणवर्ट रायबाकं हुकेरिकाम्। काण्डग्रामं हरिद्रां च घुणिकां किणिकामपि।। अरगं तिलसंगं च केरुरं चाम्बुपं पुनः। कामलापुरसंयुक्तामतनीं च त्रिकूटकम् ।। एतान्यन्यानि च महापत्तनानि पुराणि च। निगृह्य निग्रहाभिज्ञो निन्ये नेता स्वनिघ्नताम्।।
कवठ, बोरगांव, गालगांव, कुण्डल, घोगांव, सतीकीर आडभिरज, ओकाक, दोदवाड, मुरवाड़, घारवाड़ का बड़ा किला, क्षुन्द्रवंद्यपुर, श्यामगांव, माथिल, पारगांव, सांगली, काणद, कुरुन्दवाड़ी, कागल, हेबाज, हनुवल्ली, हूणवाड, रायबाग, हुकेरी, कांडगांव, हकदी, धुणिका, किणी, अरग तेलसंग केरुर, अंबुप, कमलापूर, अथली तिकोटे, यें और बड़े नगर व पुरीयों को जीतकर उस विजयी नेताजी ने अपने कब्जे में किए।
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