मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 24
यावद्युध्यति जोहरेण बालना क्रुद्धः प्रणालाचले, राजा तावदमी वयं समुदिताचक्रावतीमण्डले । योत्स्यामः प्रतियोधिभिः प्रतिपदं दुर्गस्थितानामिदम् । विज्ञायाभिमतं तथा न विदधे शास्तापि शस्तं मनः ॥
जब तक क्रोधी शिवाजी राजा पन्हाळ के किले पर बलशाली जोहर से युद्ध करते हैं, तब तक हम सब मिलकर चाकणप्रान्त में क्रमशः लड़ेंगे, ऐसी किल्ले में रहने वालों की इच्छा जानकर शाएस्ताखान को अच्छा नहीं लगा।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें