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शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 20
प्रोच्छिन्नदेवायतनं छिन्नभिन्नमठीमठम् । भज्यमानाध्यक्षगृहं भग्नोद्यानमहीरुहम् ॥ प्रभूतविजनीभूतप्रतनप्रामपत्तनम् । पर्यटन्म्लेच्छकटकस्पष्टभ्रष्टसरित्तटम् ॥ ग्रस्तं विधुन्तुदेनेव निखिलं विधुमण्डलम् । दर्शनीयेतरमभूत् तदा तन्मेदिनीतलम् ॥
तदनन्तर मन्दिरों का विध्वंस किया, छोटे बड़े मठ छिन्न-भिन्न कर दिए, अधिकारियों के घर मिट्टी में मिला दिए, बगीचों के वृक्ष तोड़ दिए, बहुत से पुराने गांव व नगर सुनसान कर दिए, सब जगह घूमने वाले मुसलमान सैनिकों ने नदीतट भ्रष्ट कर दिए, इस प्रकार वह भूप्रदेश आकाश में चन्द्रग्रहण के समान भयानक दिखने लगा।
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