मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 17
मानी शमसखानाख्यः पटानः प्रथितक्रमः । सुतो जाफरखानस्य नामदारश्च दुर्जयः ॥ तथा गया। सु। दीखानो मुनीमो हसनोऽपि च । मिरजासुलतानश्च प्रतापी मनचेहरः ।। तथा तुरुकताजश्च क्रूरात्मा च कुबाहतः हौदखानोऽप्युजबखात्रयोऽमी समरोन्मुखाः ॥ इमामबिरुदीखानो लोदीखानश्च दुर्धरः । पठानी द्वाविमौ तद्वद् मौलदौ द्वौ दिलावरी ॥ तथाबदुलवेगश्च भंगडः खोजडम्बरः । जोहरच पुनः खोजसुलतानः पराक्रमी ॥ सिदीफतेफतेजंगी रणरङ्गविशारदी। क्रोधनः कारतलवो गाजीखानादयोऽपि च ॥ तनयः शत्रुशल्यस्य भावसिंहः प्रभावभृत् । किशोरशामसिंहाह्वी राजानी चास्य बान्धवी ॥ राजा गिरिधरो नाम तथैव च मनोहरः । प्रद्युम्नश्वानिरुद्धश्च पञ्चमः पुरुषोत्तमः ॥ गोवर्धनेन सहिताः षडमी गौडवंशजाः । क्षत्रियाः क्षपितारातिकुलाः क्षितिभृतां वराः ॥ गौडविठ्ठलदासस्य नप्ता सप्ताश्वसन्निभः । सुतोऽर्जुनस्य विजयी राजसिंहश्च पार्थिवः ॥ वीरो बीरमदेवश्च रामसिंहश्च सुव्रतः । तथैव रायसिंहश्च त्रयोऽमीशीर्षदान्वयाः ॥ श्रीमानमरसिंहाख्यो राजा चंद्रवतान्वयः । तथा चन्द्रपुरेन्द्रस्य सेनापतिररिन्दमः ॥ द्वारकाजिच्च जीवाजित् पर्शुजिद्दलजित् पुनः । शरीफ-नृपसूनुश्च त्र्यंबकः समरोन्मुखः ।। एते भूशबलाः प्रौढबलाः सर्वे प्रतापिनः । गोकपाटश्च सुरजिद्यशोजिच्च महाभुजः ॥ राजा दिनकरश्चापि ख्यातः कांकटकान्वयः। त्र्यम्बकानन्तदत्ताख्याखयः खण्डार्गळान्वयाः ।। दत्तरुस्तुमवर्माणौ राजानी यादवान्वयौ। सर्वजित्तनयो रम्भः प्रवारः परवीरहा।। जायामुदयरामस्य जगज्जीवनमातरम्। राजव्याघ्रीति यां प्राहुर्युधि व्याघ्नीमिवोद्धुराम्।। सा प्रतापेन महता बताप्रतिहतायुधा। कृष्णराजप्रचण्डाद्यैः सहिताऽऽत्मसनामभिः ।। घाण्टिकः सर्जराजश्च गाढः कमल एव च। कोकाटो जसवन्तश्च कमलेन समन्वितः ॥ दिल्लीपतेर्नियोगेन सर्व एते महाभुजाः । स्वस्वसैन्यान्विताः शास्ताखानं सेनान्यमन्वयुः ॥
प्रसिद्ध पराक्रमी एवं मानी शमसखान पठाण, जाफरखान का पुत्र दुर्जयी नामदार, वैसे ही गयासुदीखान, हसन मुनीम सुतान मिर्जा, प्रतापी मनचेहर, तुरुकताज, क्रूर कुबाहत और हौदखान, उझबेग ये तीनों युद्धोत्सुक, इमाम विरुदीखान एवं दुर्जयी लोदीखान ये दोनों पठाण, वैसे ही दोनों दिलावर मौलव, अब्दुल वेग, प्रसिद्ध खोजा भंगड़, जोहर, पराक्रमी खोजा सुल्तान, युद्धविशारद सिद्दी फते एवं फतेजंग, क्रोधी कारतलब, गाजीखान आदि सरदार, शत्रुशल्य का पुत्र पराक्रमी भावसिंह, उनके भाई किशोरसिंह एवं रामसिंह ये दोनों राजा, राजा गिरिधर मनोहर, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, पांचवा पुरुषोत्तम एवं गोवर्धन ऐसे छः गौड़वंशीय शत्रुविनाशक श्रेष्ठ क्षत्रिय राजा, गौड़ विठ्ठलदास का सूर्य के समान तेजस्वी पोता, अर्जुन का पुत्र विजयी राजा राजसिंह, ये तीनों सिसोद वंश के राजा, चन्द्रवंत वंश के राजा श्री अमर सिंह, चन्द्रपूर के राजा का सेनापति अरिंदम द्वारकाजित्, जिवाजी, परसोजी, बालाजी, शरीफ राजा का पुत्र युद्धोत्सुक त्र्यम्बक ये सब पराक्रमी व महाबलुशली, भोसले, त्र्यम्बक, अनंत एवं दत्त ये तीनों खंडार्ग का वंश के दत्त और करतुग ये यादववंशी, सर्वाजी का पुत्र शत्रुवीत्थ रंभाजी पवार, युद्ध में शेरनी के समान निर्भयी उदयराम की पत्नी जगतजीवन की माता, रायशेरणी, नाम से प्रसिद्ध, बड़े प्रताप के कारण अप्रतिध्वणित स्त्री एवं उसका कृष्णराज, प्रचंड आदि भाई, सर्जेराव घाटगे, कमलाजी गाढे, जसवंतराव एवं कमलाजी कोकाटे, ये सभी बलशाली, सरदार दिल्लीपति की आज्ञा से अपनी सेना के साथ शाएस्तेखान के पीछे-पीछे गए।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
शिवभारतम् के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

शिवभारतम् के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें