प्रसिद्ध पराक्रमी एवं मानी शमसखान पठाण, जाफरखान का पुत्र दुर्जयी नामदार, वैसे ही गयासुदीखान, हसन मुनीम सुतान मिर्जा, प्रतापी मनचेहर, तुरुकताज, क्रूर कुबाहत और हौदखान, उझबेग ये तीनों युद्धोत्सुक, इमाम विरुदीखान एवं दुर्जयी लोदीखान ये दोनों पठाण, वैसे ही दोनों दिलावर मौलव, अब्दुल वेग, प्रसिद्ध खोजा भंगड़, जोहर, पराक्रमी खोजा सुल्तान, युद्धविशारद सिद्दी फते एवं फतेजंग, क्रोधी कारतलब, गाजीखान आदि सरदार, शत्रुशल्य का पुत्र पराक्रमी भावसिंह, उनके भाई किशोरसिंह एवं रामसिंह ये दोनों राजा, राजा गिरिधर मनोहर, प्रद्युम्न, अनिरुद्ध, पांचवा पुरुषोत्तम एवं गोवर्धन ऐसे छः गौड़वंशीय शत्रुविनाशक श्रेष्ठ क्षत्रिय राजा, गौड़ विठ्ठलदास का सूर्य के समान तेजस्वी पोता, अर्जुन का पुत्र विजयी राजा राजसिंह, ये तीनों सिसोद वंश के राजा, चन्द्रवंत वंश के राजा श्री अमर सिंह, चन्द्रपूर के राजा का सेनापति अरिंदम द्वारकाजित्, जिवाजी, परसोजी, बालाजी, शरीफ राजा का पुत्र युद्धोत्सुक त्र्यम्बक ये सब पराक्रमी व महाबलुशली, भोसले, त्र्यम्बक, अनंत एवं दत्त ये तीनों खंडार्ग का वंश के दत्त और करतुग ये यादववंशी, सर्वाजी का पुत्र शत्रुवीत्थ रंभाजी पवार, युद्ध में शेरनी के समान निर्भयी उदयराम की पत्नी जगतजीवन की माता, रायशेरणी, नाम से प्रसिद्ध, बड़े प्रताप के कारण अप्रतिध्वणित स्त्री एवं उसका कृष्णराज, प्रचंड आदि भाई, सर्जेराव घाटगे, कमलाजी गाढे, जसवंतराव एवं कमलाजी कोकाटे, ये सभी बलशाली, सरदार दिल्लीपति की आज्ञा से अपनी सेना के साथ शाएस्तेखान के पीछे-पीछे गए।
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