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शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 15
कवीन्द्र उवाच - शिवस्योपचयं वीक्ष्य तथापचयमात्मनः । याचितां येदिलेनोच्चैः सहायमभिवाञ्छता ॥ दिल्लीपतिः स्वपृतनां पृथुसारां प्रथीयसीम्। बलिना मातुलेनाद्धा शास्ताखानेन रक्षिताम् ।। प्रपन्नपालनपरः शतशो जितस‌ङ्गरः। प्रयातुमादिशत्तूर्णं धारागिरितलस्थिताम् ।।
कवीन्द्र बोले - शिवाजी महाराज का उत्थान एवं अपना पतन देखकर उत्कृष्ट सहायता करने वाला मिल जाए इसलिए आदिलशाह तो दिल्ली की ओर से सैनिक बुलाने पर भी शरणागतों की रक्षा करने में तत्पर एवं जिसने हजारों युद्ध में विजय पायी है, ऐसे दिल्ली के राजा हमारा मामा पराक्रमी शाएस्तेखान के सेनापतित्व में देवगिरी किले के तलहटी में अपनी सामर्थ्यशाली व बड़ी सेना के साथ जल्दी से जाने की आज्ञा दी।
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