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शिवभारतम् • अध्याय 25 • श्लोक 14
मनीषिण उचुः - अल्ली दिल्लीपतेः सेनां विद्युतावोधनस्मयाम्। विसृज्य दूतमात्मीयं द्रुतमाह्वयति स्म याम्।। सा पुनः कियती केन नायकेनाभिरक्षिता। केनाध्वना क्वचायाता किं कार्यं चान्वपद्यत ।। कि प्रतीकारमकरोच्छिवराजश्च तां प्रति। परमानन्द सुमंते तत्सर्वमभिधीयताम् ।।
पंडित बोलें - अल्ली आदिलशाह ने अपना दूत भेजकर युद्ध में गर्व से लड़ने वाली दिल्लीपति की जो सेना बुलाई है, वह कितनी थी, उसका नायक कौन था? वह किस यान से कहां आया, उन्होंने कौन-सा कार्य आरम्भ किया और शिवाजी ने उसका कैसे प्रतीकार किया। यह सब हे बुद्धिमान परमानन्द बताओ।
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