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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 8
विपिने, फजलं तत्र यो हन्त हतवान् रुपा । आशीविष इवोच्छीर्षगतो नोपेक्ष्य एव सः ॥
अरे रे! उस वन में अफजल खान को जिसने क्रोध से मार दिया उसकी सिर स्थित वैशाली सांप की तरह उपेक्षा नहीं करनी चाहिए।
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