तदनु शिवनृपस्तं प्राप्तभंग पुरस्तात् प्रसभमपसरन्तं रुस्तुमं त्रस्तमुच्चैः । निकटगमपि नैव न्यग्रहीन्निग्रहाहै न हि विदधति भीरी शूरतां सूर्यवंश्याः ॥
तत्पश्चात् पराजित हुआ तथा अत्यंत भयभीत, सामने से वेग से पलायन करने वाले उस रुस्तुम को समीप होते हुए भी एवं पकडने योग्य होने पर भी शिवाजी ने नहीं पकड़ा, क्योंकि सूर्यवंशी राजा भयभीतों पर पराक्रम नहीं दिखाते है।
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