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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 6
सहसा साहसात् स्वामिकार्यव्ययितजीवितः । स यातस्तां दशां तर्हि न यातः शोचनीयताम् ॥ कृतहस्तः स्वयं तत्र कुसृतिप्रकृतिः परः । तमेकाकिनमाहय हतवान् विजने वने ॥ यद्ययास्यत् तदा तत्र सेनामादाय भूयसीम् । असावजलस्तर्हि नायास्यत् तादृशीं दशाम् ॥
आदिलशाह बोला - सहसा साहस करने के कारण स्वामी कार्य के लिए प्राणों को न्यौछावर करने वाले उसको (अफजलखान) यदि यह अवस्था प्राप्त हुई तो वह सोच नीयत को प्राप्त हुआ है ऐसा नहीं है। स्वयं धनुष कला में निपुण और कपटी स्वभाव वाले शत्रु ने उसको वहां अकेला बुलाकर निर्जन वन में मार दिया।
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