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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 55
रत्नाद्याभरणविभूषिता युवानः संग्रामाङ्गणभुवि लोहितांगरागाः। अन्येभ्यो भयमपहाय केऽपि वीरश्रीयुक्ताः शरशयनेषु शेरते स्म ॥
रत्नों, अलंकारों से विभूषित एवं रक्तरंजित अंग वाले कुछ युवा वीर दूसरों के भय को छोड़कर वीर श्री से युक्त होकर रणभूमि पर सो गये।
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