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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 54
नेतारं भूशबलभूपवाहिनीनां नेतारं कुपितमुदीक्ष्य फाजिलोऽद्धा । उच्चैरुच्चरितपदां पपाठ नांदीं प्रारंभे द्रुतमपयानरूपकस्य ॥
शिवाजी की सेना के नायक नेताजी को उत्तेजित हुआ देखकर फाजल ने वास्तव में प्रारंभ में ही पलायनरूपी नाटक की नांदी उच्चध्वनि से पढ़ दी थी।
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