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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 53
सोल्लासं भूशबलसैन्यपातितानां दंभोलिप्रकृतिभृतां बतायुधानाम् । संघातं कथमपि सेहिरे न तस्मिन् संमर्दे सुमहति रुस्तुमायुधीयाः ॥ तिष्ठन्तं करटिकदंब दुर्गदेशे गर्जन्तं घनमिव फाजिलं तदोच्चैः । आक्रामन् मरुदिव सर्वतो बलीयान् उद्घान्तं शिवपृतनापतिर्व्यधत्त ॥
गजसमूहरूपी दुर्ग के मध्य में स्थित हुए एवं मेघ की तरह प्रचंड गर्जना करने वाले फाजल पर प्रचंड वायु के समान चारों ओर से आक्रमण करके शिवाजी के सेनापति ने उसको उद्विग्न कर दिया।
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