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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 52
कर्षन्तः सपदि धनूंषि सप्रकर्ष युध्यन्तः शिवसुभटाः शरैरमोधैः । क्रुद्धानामभिपततां महायुधानां म्लेच्छानामदयमपातयंच्छिरांसि ॥
भोसले की सेना द्वारा उत्साह में फेंके गए वज्र के समान शत्रों के समूह को रुस्तुम के योद्धा, उस अति प्रचंड भीड़ में वास्तव में सहन नहीं कर सकें।
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