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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 50
अभ्येतप्रतिभटचंडचंद्रहासप्रौढिम्मा द्रुतमपमूर्धतां प्रपद्य। लिष्यद्धिः क्षितिमपि बद्धमुष्टिभावान्नोन्मुक्ताः क्वचन पताकिभिः पताकाः ॥
आक्रमण करने वाले शत्रु योद्धाओं के तीक्ष्ण तलवारों के प्रभाव से मस्तक वेग से तुटकर भूमि पर गिरने पर भी ध्वजधरियों ने मुठ्ठियों से मजबूत पकड़ने के कारण ध्वजा कहीं नहीं गिर पायी।
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