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शिवभारतम् • अध्याय 24 • श्लोक 5
येदिलस्तमथोद्वीक्ष्य विषीदंतमधोमुखम् । जगाद गर्वगर्भाभिर्गीर्भिरुत्साहयन् भृशम् ॥
वह दुःखी एवं नतमस्तक हैं ऐसा देखकर, आदिलशाह गरबा युक्त वचनों से उस को प्रेरित करते हुए बोला।
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